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क्षमा से मन की कटुता होती है समाप्त, मैत्री और करुणा का भाव होता है जागृत

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दिगंबर जैन मंदिर परिसर में मनाया गया क्षमावाणी महोत्सव

हेमन्त कुमार श्रीवास्तव/ ओम मिश्रा

इकौना-श्रावस्ती। दिगंबर जैन मंदिर परिसर में रविवार को अध्यक्ष संजीव जैन की अध्यक्षता में क्षमावाणी महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टीकमगढ़ से आए राजीव जैन उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विधि-विधान से भगवान महावीर स्वामी का जलाभिषेक एवं पूजन किया गया।इस अवसर पर अध्यक्ष संजीव जैन ने कहा कि दस धर्मों एवं रत्नत्रय की आराधना से मन की कटुता समाप्त होकर निर्मलता आती है।

क्षमाभाव आत्मा का स्वरूप है, जिसमें करुणा और परस्पर मैत्रीभाव का दर्शन होता है। जैन धर्म संस्कृति में क्षमा को महत्वपूर्ण धर्म माना गया है। क्षमा मन की मलीनता को दूर कर परस्पर सह-अस्तित्व और सद्भाव की भावना को मजबूत करती है। यह संसार के सभी प्राणियों के प्रति सहानुभूति रखने का संदेश देती है।वहीं महेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष दिगंबर जैन मंदिर श्रावस्ती ने कहा कि दिगंबर जैन आम्नाय के श्रद्धालु अश्विन कृष्ण प्रतिपदा को क्षमावाणी पर्व मनाते हैं।

इस दिन मंदिर में क्षमावाणी पूजन के बाद सभी एक-दूसरे से अपनी जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं और दूसरों को भी क्षमा करते हैं। यही क्षमाधर्म दशलक्षण धर्म की विशेषता है।उन्होंने बताया कि प्राकृत भाषा में “मिच्छामि दुक्कड़म्” का भाव है—जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए परस्पर क्षमा मांगना और दूसरों को हृदय से क्षमा करना। क्षमावाणी पर्व समाज में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता है।महोत्सव के दौरान जैन समाज की महिला मंडल द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।इस अवसर पर महेंद्र कुमार जैन, श्रेयांश जैन, नवीन कुमार जैन, संजीव जैन, मनीष जैन, सुनील जैन, सौरभ जैन सहित जैन समाज के अनेक लोग मौजूद रहे।

 

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